रायपुर, 29 जुलाई 2026/ जीवन में अपनों को खोने का दुख किसी भी व्यक्ति को गहरे मानसिक आघात में डाल सकता है। ऐसे समय में यदि भावनात्मक और सामाजिक सहारा मिल जाए, तो जीवन को नई दिशा मिल सकती है। छत्तीसगढ़ शासन के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित सखी वन स्टॉप सेंटर ने ऐसी ही एक महिला को अवसाद और नशे की गिरफ्त से बाहर निकालकर उसे फिर से सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर दिया। दंतेवाडा के आवंराभाटा क्षेत्र की रहने वाली प्रीति सिंह ने कुछ वर्ष पहले अपने पुत्र को बीमारी के कारण खो दिया था। इससे पहले उनके पति का भी निधन हो चुका था। लगातार मिले इन दुखद आघातों के कारण वह गहरे अवसाद में चली गईं और धीरे-धीरे शराब की आदी हो गईं। उन्होंने घर पर रहना छोड़ दिया और कई दिनों तक बिना भोजन के इधर-उधर भटकती रहीं। *सूचना मिलते ही सखी सेंटर ने की मदद* स्थानीय लोगों ने महिला की स्थिति की जानकारी महिला एवं बाल विकास विभाग को दी। इसके बाद सखी वन स्टॉप सेंटर की टीम मौके पर पहुंची। महिला की मानसिक और नशे की स्थिति को देखते हुए 112 पुलिस सेवा की सहायता से उनका सुरक्षित रेस्क्यू किया गया और उन्हें सखी सेंटर लाया गया। सेंटर में उनकी नियमित देखभाल की गई। चिकित्सकों की निगरानी में उपचार कराया गया और लगातार काउंसलिंग के माध्यम से उनका मानसिक संबल बढ़ाया गया। *काउंसलिंग से बढ़ा आत्मविश्वास* काउंसलिंग के दौरान प्रीति सिंह ने बताया कि वह दूसरों के घरों में काम करके अपना जीवन चलाती थीं, लेकिन पति और पुत्र के निधन के बाद अकेलापन और तनाव उन्हें नशे की ओर ले गया। सखी सेंटर के काउंसलरों ने उन्हें स्वास्थ्य सुधार और सुरक्षित वातावरण में रहने की सलाह दी। हालांकि उन्होंने नारी निकेतन में रहने के बजाय अपनी बेटी के साथ रहने की इच्छा व्यक्त की। *बेटी से मिलाया, परिवार से जोड़ा* सखी सेंटर की टीम ने महिला की बेटी का पता लगाया और उसे अपनी मां की देखभाल के लिए प्रेरित किया। जिला कार्यक्रम अधिकारी और जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी के मार्गदर्शन में सखी सेंटर की टीम ने प्रीति सिंह को पूरी तरह स्वस्थ और नशा मुक्त होने के बाद सुरक्षित रूप से रायपुर में उनकी बेटी के पास पहुंचाया। अपनी बेटी के साथ सुरक्षित पहुंचने के बाद प्रीति सिंह ने महिला एवं बाल विकास विभाग और सखी वन स्टॉप सेंटर की टीम के प्रति आभार व्यक्त किया। *महिलाओं के लिए भरोसे का केंद्र* यह कहानी दर्शाती है कि सखी वन स्टॉप सेंटर केवल संकट में फंसी महिलाओं को आश्रय ही नहीं देता, बल्कि उन्हें मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक सहयोग प्रदान कर जीवन की नई शुरुआत करने में भी मदद करता है। छत्तीसगढ़ शासन की यह पहल महिलाओं के संरक्षण, पुनर्वास और सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रभावी और संवेदनशील प्रयास है। पोस्ट नेविगेशन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 के पारित होने का किया स्वागत संसाधनों की कमी नहीं रोक सकी किसान पुत्र रमन की उड़ान,दूरस्थ आदिवासी अंचल के छात्र ने बिना कोचिंग सेल्फ स्टडी से नीट परीक्षा में पाई सफलता