शहर की मुख्य सड़कों और मोहल्लों में पिछले दो महीने से अंधेरा पसरा है। नगर पंचायत द्वारा लगाई गई नई स्ट्रीट लाइटें, जो ठेकेदार ने इंस्टॉल करके टेस्टिंग के समय जलाकर दिखाईं थीं, अब लगातार बंद हैं। सवाल यह है कि जब लाइटें लग चुकी थीं और टेस्टिंग के समय जल रही थीं, तो अब अचानक क्यों बुझ गईं?

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जांच में जो कारण सामने आया, वह चौंकाने वाला है—बिजली का बिल बकाया। सूत्रों के मुताबिक, नगर पंचायत का बिल कई महीनों से जमा नहीं हुआ, जिसके चलते विद्युत विभाग ने सप्लाई काट दी। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह तो सीधे-सीधे लापरवाही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब ठेकेदार ने लाइट लगाकर चेक किया था, तब वे ठीक से जल रही थीं, लेकिन कुछ ही दिनों बाद लाइटें बंद हो गईं। पूछताछ करने पर पता चला कि बिजली का बिल बकाया है, जिसके चलते कनेक्शन काट दिया गया।अब जनता का सवाल है — “अगर समस्या बिजली बिल की है तो इसे समय पर क्यों नहीं भरा गया? आखिर जिम्मेदार कौन है?”लोग नगर अध्यक्ष से भी जवाब मांग रहे हैं कि आखिर इस मामले पर वे चुप क्यों हैं, जबकि समस्या सीधे आम जनता की सुविधा और सुरक्षा से जुड़ी है।

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